नई दिल्ली:
मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान और इजरायल के बीच हालिया हमलों के बाद हालात गंभीर होते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर संयुक्त हवाई हमले किए गए हैं, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इस कार्रवाई को “प्री-एम्प्टिव अटैक” बताया है। वहीं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस” करार दिया है। तेहरान, कोम और इस्फहान समेत कई शहरों में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया है।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है। भारत अपनी करीब 80 से 85 प्रतिशत तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जिसमें खाड़ी देशों का अहम योगदान है। ऐसे में अगर तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है।
बताया जा रहा है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत पहले ही करीब 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है और युद्ध की स्थिति गंभीर होने पर इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और परिवहन लागत पर भी पड़ सकता है।
महंगाई और आम लोगों पर असर
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे तौर पर महंगाई पर पड़ता है। खासकर ग्रामीण और मध्यम वर्ग के लिए दैनिक खर्च बढ़ सकता है। इसके अलावा उद्योग, एयरलाइंस और परिवहन क्षेत्र पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है।
शेयर बाजार और व्यापार पर दबाव
वैश्विक तनाव बढ़ने पर निवेशक आमतौर पर सतर्क हो जाते हैं, जिसका असर शेयर बाजारों पर भी देखने को मिलता है। ऐसे में भारतीय शेयर बाजार में भी उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। साथ ही समुद्री व्यापार मार्गों में बाधा आने से शिपिंग लागत बढ़ने की आशंका है, जिससे भारत के निर्यात—जैसे बासमती चावल, दवाइयां और कपड़ा उद्योग—पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
भारत सरकार की एडवायजरी
भारत और इजरायल के बीच मजबूत रक्षा और तकनीकी संबंध हैं। ऐसे में भारत सरकार ने इजरायल में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवायजरी जारी की है और उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी है।
इसके अलावा खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा पर भी सरकार नजर बनाए हुए है। यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जा सकता है।



