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इजराइल–ईरान तनाव का असर: भारत के पास सिर्फ 25 दिन का तेल भंडार, होर्मुज संकट से बढ़ी चिंता…

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान तथा इजराइल के बीच टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। इसी बीच सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर सामने आई है कि भारत के पास फिलहाल करीब 25 दिनों का कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक मौजूद है।

हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

होर्मुज रूट बंद होने की चेतावनी से बढ़ी चिंता

तनाव के बीच दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर स्थिति गंभीर हो गई है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग को बंद करने की चेतावनी दी है।

यह मार्ग वैश्विक तेल व्यापार की लाइफलाइन माना जाता है। अगर यहां से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो एशिया के कई देशों, खासकर भारत, की ऊर्जा सप्लाई पर सीधा असर पड़ सकता है।

इसी बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 5.5% बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव बढ़ता है तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती हैं।


फिलहाल नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

सरकारी सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है।

हाल ही में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वरिष्ठ अधिकारियों और तेल कंपनियों के साथ हाई-लेवल बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।
सरकार का कहना है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।


शिपिंग और व्यापार पर भी असर

ऊर्जा संकट के साथ-साथ सरकार एक्सपोर्ट-इंपोर्ट सेक्टर पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी सतर्क हो गई है।

Directorate General of Foreign Trade (DGFT) ने लॉजिस्टिक्स और शिपिंग कंपनियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।
रिपोर्ट के अनुसार तनाव के कारण कई जहाजों को अपने रूट बदलने पड़ रहे हैं, जिससे

  • ट्रांजिट टाइम बढ़ रहा है

  • इंश्योरेंस लागत महंगी हो रही है

  • सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है

सरकार ने दस्तावेजी प्रक्रिया और भुगतान प्रणाली को आसान बनाने पर भी जोर दिया है।


भारत की तेल निर्भरता बढ़ा रही चुनौती

भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 85% आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। ऐसे में इस क्षेत्र में कोई भी भू-राजनीतिक संकट सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था और महंगाई को प्रभावित कर सकता है।


रूस से तेल खरीद बढ़ाने की तैयारी

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक मौजूदा हालात को देखते हुए भारत फिर से रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।

बताया जा रहा है कि एशियाई जलक्षेत्र में करीब 95 लाख बैरल रूसी तेल कार्गो मौजूद है, जिन पर भारत की नजर बनी हुई है। जरूरत पड़ने पर इन टैंकरों को तुरंत रिसीव कर सप्लाई चेन को मजबूत किया जा सकता है।

रूस से तेल खरीद के फायदे:

  • वैश्विक बेंचमार्क कीमतों से कम दर

  • संकट के समय सुरक्षित सप्लाई विकल्प

  • घरेलू महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद

दिसंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार रूस से तेल खरीदने में भारत तीसरे स्थान पर रहा, जबकि चीन पहले और तुर्किये दूसरे स्थान पर थे।


आगे क्या हो सकता है?

अगर होर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या मार्ग बाधित होता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

फिलहाल भारत सरकार रणनीतिक भंडार, वैकल्पिक सप्लाई रूट और रूस जैसे विकल्पों के जरिए ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।

हालांकि आम जनता के लिए फिलहाल राहत की खबर यही है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की संभावना नहीं जताई गई है।

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