उत्तराखंड में बिजली सप्लाई का संचालन Uttarakhand Power Corporation Limited (UPCL) द्वारा किया जाता है। किसी भी उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन काटने की प्रक्रिया मनमाने तरीके से नहीं की जा सकती। इसके लिए Electricity Act, 2003 की धारा 56 और राज्य के सप्लाई कोड में स्पष्ट नियम तय किए गए हैं।

कनेक्शन काटने से पहले क्या करना होता है?
1. बकाया बिल की सूचना देना जरूरी
यदि किसी उपभोक्ता पर बिजली बिल बकाया है, तो विभाग को पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य होता है। नोटिस में बकाया राशि और भुगतान की अंतिम तिथि स्पष्ट रूप से दर्ज होती है। आमतौर पर उपभोक्ता को बिल जमा करने के लिए लगभग 15 दिन का समय दिया जाता है।
2. नोटिस अवधि पूरी होने का इंतजार
नोटिस देने के बाद विभाग को निर्धारित समय तक इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान उपभोक्ता के पास बिल जमा करने या बिल को लेकर आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार होता है।
3. भुगतान न होने पर ही कट सकती है बिजली
अगर तय समय सीमा के भीतर बिल जमा नहीं किया जाता, तभी विभाग बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई कर सकता है। व्यवहारिक तौर पर कई मामलों में कटौती से पहले अंतिम रिमाइंडर या मौके पर सूचना भी दी जाती है।
किन मामलों में तुरंत कट सकता है कनेक्शन?
कुछ विशेष परिस्थितियों में बिना पूर्व नोटिस भी बिजली सप्लाई रोकी जा सकती है, जैसे—
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बिजली चोरी या मीटर से छेड़छाड़
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शॉर्ट सर्किट, आग या जान-माल को खतरा होने की स्थिति
ऐसे मामलों में विभाग तुरंत कनेक्शन काट सकता है।
दोबारा कनेक्शन का नियम
यदि उपभोक्ता बकाया राशि और निर्धारित शुल्क जमा कर देता है, तो विभाग को तय समय सीमा के भीतर बिजली कनेक्शन दोबारा जोड़ना होता है।
उपभोक्ताओं के अधिकार
यदि बिना नोटिस बिजली कनेक्शन काट दिया जाता है, तो उपभोक्ता संबंधित विभाग में लिखित शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके अलावा उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच में भी अपील करने का अधिकार रखता है।



