उत्तराखंड की न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी सबसे बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के गौलापार स्थानांतरित करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही वर्षों से लंबित इस परियोजना का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया कि नए हाईकोर्ट परिसर के निर्माण के लिए जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराने की कोई आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उस निर्देश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें नए परिसर को लेकर जनमत संग्रह कराने की बात कही गई थी।
इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि गौलापार में प्रस्तावित हाईकोर्ट परिसर के निर्माण के लिए छह सप्ताह के भीतर भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि निर्माण कार्य बिना किसी देरी के शुरू हो सके।

गौरतलब है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के गौलापार स्थानांतरित करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। गौलापार में पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने, बेहतर सड़क संपर्क और आधुनिक न्यायिक परिसर विकसित करने की संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने यहां नए हाईकोर्ट के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया था।
अब सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद गौलापार में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हाईकोर्ट परिसर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। माना जा रहा है कि इससे न्यायिक व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी, मामलों के बेहतर प्रबंधन में मदद होगी और अधिवक्ताओं, वादकारियों तथा आम जनता को आधुनिक एवं अधिक सुविधाजनक न्यायिक सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले को उत्तराखंड की न्यायिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की अगली कार्रवाई और गौलापार में हाईकोर्ट निर्माण कार्य की शुरुआत पर टिकी हैं।




