बागेश्वर में सरस मेला-2026 का भव्य आगाज हो गया है। नुमाइशखेत मैदान में आयोजित तीन दिवसीय सरस मेले में स्थानीय उत्पादों, पहाड़ी संस्कृति और महिला उद्यमिता की शानदार झलक देखने को मिल रही है। मेले का शुभारंभ मंगलवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टमटा ने किया।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आयोजित इस मेले में महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक तांबे के बर्तन, जैविक सब्जियां, उन्नत बीज और पहाड़ के प्रसिद्ध कीवी समेत कई उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं।

खास बात यह है कि सरस मेला सिर्फ खरीदारी का मंच नहीं, बल्कि पहाड़ की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का एक बड़ा अवसर भी बन रहा है। केंद्रीय मंत्री और अन्य अतिथियों ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और महिला समूहों से संवाद कर उनके उत्पादों, स्वरोजगार और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी ली।
वहीं, मेले में कुमाऊं की लोकसंस्कृति भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा परिधान प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर पहाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को खूबसूरती से प्रस्तुत किया। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भी स्थानीय परंपराओं की झलक देखने को मिली।
मेले में जिला निर्वाचन कार्यालय की स्वीप टीम ने मतदाता जागरूकता शिविर लगाया। यहां युवाओं और आम नागरिकों को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने, 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं के पंजीकरण और मतदान प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही स्वास्थ्य और होम्योपैथी विभाग की ओर से लगाए गए स्टॉलों पर लोगों को निःशुल्क रक्त जांच और स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।
जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे ने जनपदवासियों से मेले में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने और स्थानीय उत्पादों की खरीदारी कर महिला उद्यमियों का उत्साह बढ़ाने की अपील की।

अब बात करते हैं मेले के आगामी कार्यक्रमों की। 4 नवंबर को क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, ऐपण प्रतियोगिता, रस्साकशी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। वहीं, 5 नवंबर को मेहंदी प्रतियोगिता, पुरस्कार वितरण और समापन समारोह के साथ मेले का समापन होगा।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक जितेंद्र मेहरा, जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्या, विधायक बागेश्वर पार्वती दास, विधायक कपकोट सुरेश गढ़िया समेत तमाम जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
कुल मिलाकर, बागेश्वर का सरस मेला स्थानीय उत्पादों को बाजार देने, महिला समूहों को आत्मनिर्भर बनाने और उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को मंच प्रदान करने की एक शानदार पहल बनकर सामने आया है।






