मानदेय बढ़ोतरी को लेकर सड़कों पर उतरीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, CM आवास कूच के दौरान पुलिस से धक्का-मुक्की; दिवाली को काले दिवस के रूप में मनाने का ऐलान
देहरादून। उत्तराखंड में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का अपनी मांगों को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मानदेय में बढ़ोतरी समेत विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने देहरादून में मुख्यमंत्री आवास कूच किया। गांधी पार्क से निकले कार्यकर्ताओं के जुलूस को पुलिस ने हाथीबड़कला चौक के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश कर रहीं कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई।
पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सड़क पर ही धरने पर बैठ गईं और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंगनबाड़ी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रेखा नेगी और सुशीला खत्री ने कहा कि शासन और निदेशालय स्तर पर कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद मानदेय बढ़ोतरी का शासनादेश जारी नहीं किया गया है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं, लेकिन उन्हें उनकी मेहनत के अनुरूप पारिश्रमिक नहीं मिल रहा। इतना ही नहीं, 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर उन्हें बिना पेंशन, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक सेवानिवृत्ति लाभ के सेवा से बाहर कर दिया जाता है।

9 नवंबर को मुख्यमंत्री की घोषणा का मिला आश्वासन
प्रदर्शन के बीच आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल की शासन स्तर पर वार्ता भी हुई। इसमें आश्वासन दिया गया कि 9 नवंबर को मुख्यमंत्री की ओर से उनकी मांगों को लेकर घोषणा की जाएगी। हालांकि, कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों पर ठोस निर्णय और शासनादेश चाहिए।
दिवाली को काले दिवस के रूप में मनाने की चेतावनी
आंगनबाड़ी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने बताया कि 23 अक्टूबर से प्रदेशभर की कार्यकर्ताओं ने पोषण ट्रैकर और बीएलओ समेत सभी ऑनलाइन एवं ऑफलाइन कार्यों का अनिश्चितकालीन बहिष्कार किया हुआ है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मानदेय वृद्धि का शासनादेश जारी नहीं हुआ तो प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों पर तालाबंदी की जाएगी और दीपावली को काले दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
ये हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगें
- मानदेय बढ़ाकर 24 हजार रुपये प्रतिमाह करने का शासनादेश तत्काल जारी किया जाए।
- सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये एकमुश्त दिए जाएं और नियमित मासिक पेंशन की व्यवस्था हो।
- उचित पारिश्रमिक, आवश्यक संसाधन और नियमित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।
- कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न और असम्मानजनक व्यवहार पर रोक लगाई जाए।
- लंबित मांगों के समाधान के लिए उच्च स्तरीय वार्ता की जाए।
प्रदर्शन में प्रदेश उपाध्यक्ष विमला कोहली, प्रदेश महामंत्री ममता बादल समेत बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 9 नवंबर को मुख्यमंत्री की ओर से होने वाली घोषणा से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राहत मिलेगी या फिर मानदेय बढ़ोतरी की मांग को लेकर उनका आंदोलन और उग्र होगा?






