हल्द्वानी। सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में बुधवार को उत्तराखण्ड राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड, हल्द्वानी के मुख्यालय सभागार में सहकारिता विभाग, प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (पैक्स) और जिला सहकारी बैंकों के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अन्न भंडारण योजना, वित्तीय समावेशन, एनपीए प्रबंधन, बैंक शाखाओं के विस्तार और किसान कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
सहकारिता मंत्री ने अधिकारियों को सभी योजनाओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अन्न भंडारण योजना के तहत लंबित औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा करने को कहा।
बैठक में समितियों के डिजिटलीकरण और दैनिक संचालन की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि अल्मोड़ा जिले की 74 पैक्स में से 63 में डायनमिक डे-एंड का कार्य पूरा हो चुका है। वहीं बागेश्वर की 9 समितियों और चम्पावत की सभी समितियों में शत-प्रतिशत डे-एंड का कार्य पूरा कर लिया गया है।
हर विकासखंड में लगेंगे दो वित्तीय समावेशन मेले
ग्रामीण क्षेत्रों तक सहकारी बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए जिला सहकारी बैंकों की प्रस्तावित नई शाखाओं को जल्द खोलने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही सभी बैंक शाखाओं में एकरूप साइन-बोर्ड, बेहतर आंतरिक साज-सज्जा, आधुनिक स्वरूप और स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि वित्तीय समावेशन को गति देने के लिए प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में दो-दो विशेष वित्तीय समावेशन मेलों का आयोजन किया जाएगा। इन मेलों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही आम लोगों के नए बचत खाते खोलने और स्वयं सहायता समूहों को आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

एनपीए वसूली और नए ऋणों की निगरानी पर सख्ती
बैठक में सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए एनपीए की त्वरित वसूली पर विशेष जोर दिया गया। सहकारिता मंत्री ने अधिकारियों को एनपीए की वसूली में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए।
इसके अलावा भविष्य में एनपीए बढ़ने से रोकने के लिए नए स्वीकृत और वितरित किए जा रहे ऋणों की नियमित एवं सघन निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया।
डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं में सहकारिता विभाग सक्रिय भूमिका निभाए और योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सहकारिता की योजनाओं का लाभ पारदर्शिता के साथ समाज के अंतिम छोर पर खड़े किसान, काश्तकार और आम नागरिक तक पहुंचाया जाए।






